दिनांक: 02/12/2025
प्रदेश में भूमि की सरकारी गाइडलाइन दरों में 200–300% की अचानक वृद्धि से भिलाई–दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव और पूरे छत्तीसगढ़ के लाखों नागरिक, व्यापारी, मजदूर, दस्तावेज लेखक और गृह-खरीदार गहरी परेशानी में हैं।
प्रभावित वर्गों का कहना है—
● कई क्षेत्रों में जमीनें 5–10 गुना तक महंगी हो गईं
● 50 हजार की रजिस्ट्री अब 5 लाख तक जा रही है
● रजिस्ट्री, स्टाम्प शुल्क, टैक्स और EMI सभी बढ़ेंगे
● रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में मंदी
● मजदूरों व छोटे व्यापारियों के रोजगार पर संकट
● मध्यम वर्ग और प्रथम खरीदारों का घर का सपना टूट रहा है
विरोध प्रदर्शनों में जनता ने स्पष्ट कहा—
“यह वृद्धि अव्यावहारिक है, इसे तुरंत वापस लिया जाए।”
🌍 अन्य राज्यों में भी ऐसे फैसलों के बुरे परिणाम हुए हैं
1. महाराष्ट्र (2020–21)
● सिर्फ 20–30% वृद्धि पर ही प्रॉपर्टी सेल 40% गिर गई
● सरकार का राजस्व घटा
● निर्णय को वापस लेना पड़ा
2. राजस्थान (2017)
● 60–70% वृद्धि के बाद रजिस्ट्री आधी रह गई
● बाजार ठप
● सरकार को गाइडलाइन दरें कम करनी पड़ीं
3. मध्य प्रदेश (2014)
● 50% वृद्धि होते ही भारी विरोध
● 6 महीने में समीक्षा कर दरें घटानी पड़ीं
➡️ जब 20–70% वृद्धि पर हालात खराब हो गए,
तो 200–300% वृद्धि छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत घातक होगी।
📌 संगठित पत्रकार संघ की माँगें
1️⃣ गाइडलाइन दरों की वृद्धि को तुरंत स्थगित किया जाए।
2️⃣ नई दरों का राज्य-स्तरीय पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
3️⃣ वृद्धि अधिकतम 20–30% तक सीमित रखी जाए।
4️⃣ व्यापारियों, दस्तावेज लेखकों, मजदूर संघों और प्रभावित नागरिकों से संवाद कर निर्णय लिया जाए।
5️⃣ मध्यम वर्ग व प्रथम-गृह खरीदारों को विशेष राहत नीति दी जाए।
संगठित पत्रकार संघ मानता है कि 200–300% गाइडलाइन वृद्धि—
● व्यापार
● रोजगार
● रियल एस्टेट
● और आम जनता के आर्थिक जीवन
सब पर गंभीर नकारात्मक असर डालेगी।
संघ छत्तीसगढ़ के सभी प्रभावित वर्गों के साथ खड़ा है और सरकार से जनहित में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग करता है।
अध्यक्ष – हसमत आलम (भिलाई)
📞 9111123444
संगठित पत्रकार संघ, छत्तीसगढ़
