RNI - NO : CHHHIN/2015/65786

September 27, 2022 12:12 AM

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भानुप्रतापपुर में विश्व आदिवासी दिवस पर जमकर थिरके समाज के लोग ।

कांकेर ट्रैक सीजी / खिलेश्वर कुमार_ प्रकृति के प्रथम पुजारी कहे जाने वाले आदिवासी समाज ने कांकेर जिला के भानुप्रतापपुर मे 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अपने पुरखो को याद कर,पूजा अर्चना कर धूम धाम से विश्व आदिवासी दिवस मनाया, साथ ही आदिवासी युवाओ के द्वारा गोंडवाना भवन से मंगल भवन तक तक रैली भी निकाली गई,तथा समाज के बुजुर्गो के द्वारा आज के युवा पीढ़ी को अपनी आदिवासी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया ।विश्व आदिवासी दिवस में उत्साह दिखा गांव गांव में हुई पूजा अर्चना भानूप्रतापपुर 9 अगस्त 2022 विश्व आदिवासी दिवस पर भानुप्रतापपुर में सर्व आदिवासी समाज के द्वारा विभिन्न आयोजन किए गए इस अवसर पर समाज के लोगों में भरपूर उत्साह दिखा बारिश के बावजूद विश्व आदिवासी दिवस मनाने के लिए भारी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के लोग एकत्रित हुए भानुप्रतापपुर में स्थित गोंडवाना समाज भवन में सुबह से ही समाज के लोगों ने एकत्रित होना शुरू कर दिया था यहां पर स्थित देव स्थल पर सुबह पारंपरिक रूप से बूढ़ादेव व अन्य देवी देवताओं की पूजा अर्चना की गई आदिवासी समाज की परंपरा के अनुसार समाज के प्रमुखों व वरिष्ठ जनों को पगड़ी पहनाया गया। इसके बाद आदिवासी समाज का सात रंगों वाले झंडे का ध्वजारोहण किया गया। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में भानुप्रतापपुर नगर एवं पूरे विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने भाग लिया। गोंडवाना भवन में पूजा अर्चना के पश्चात रैली निकाली गई और बिरसा मुंडा की प्रतिमा में भी विधि विधान से पूजा अर्चना कर उन्हें याद किया गया। समाज की यह विशाल रैली नाचती गाती मुख्य चौक पर पहुंची, जहां पर पारंपरिक वेशभूषा में सजे धजे युवक युवतियों एवं अन्य ग्रामीणों ने जमकर रेला नृत्य किया। मुख्य चौक पर समाज के लोग इतनी भारी तादाद में एकत्रित थे, कि पूरा चौक जनसमूह से भर गया। चौक में गोंडी गीतों एवं अन्य पारंपरिक गीतों पर नृत्य प्रदर्शन के बाद रैली आगे बढ़ी। इसके बाद कांकेर रोड स्थित रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर भी पूजा अर्चना की गई। इसके बाद यह रैली भानुप्रतापपुर लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह के समक्ष विशाल सभा में तब्दील हुई। इस सभा को सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारियों एवं कई वरिष्ठ जनों ने संबोधित किया। वक्ताओं ने प्रमुख रूप से अपनी संस्कृति को सहेज कर विकास के पथ पर आगे बढ़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी भाषा, बोली, रीति-रिवाजों, मान्यताओं की समझ व संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। दुनिया भर का आदिवासी समाज प्रकृति से जुड़ा हुआ है, और प्रकृति का रखवाला भी है। समाज के लोगों को आपस में एकजुट रहते हुए अपनी संस्कृति के अनुरूप कार्य करते हुए अपने धरोहरों को बचाए रखना है, और इन सब की जानकारी अगली पीढ़ियों को स्थानांतरित करना है।इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज के द्वारा बच्चों के लिए चित्रकला रंगोली एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया था जिसमें कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों ने उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया इस प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को प्रोत्साहन स्वरूप इनाम दिए गए वही विजेता बच्चों को भी विशेष इनाम प्रदान किए गए।

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प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे चित्रकला प्रतियोगिता माध्यमिक वर्ग में आकाशी शोरी प्रथम दिव्यांशी नरेटी द्वितीय प्राथमिक वर्ग में दिशा तेता प्रथम परिधि हुपेंडी द्वितीय। निबन्ध लेखन में माध्यमिक वर्ग में आकाशी शोरी प्रथम, दिव्यांशी हुपेंडी द्वितीय। रंगोली प्राथमिक वर्ग में ख्याति मण्डावी प्रथम, माध्यमिक वर्ग में महिमा उइके प्रथम व तान्या ठाकुर द्वितीय रहे। सामूहिक नृत्य में प्रथम आकाशी शोरी राशि चनाप व साथी द्वितीय डिम्पल व साथी रहे। एकल नृत्य में दिव्यांशी हुपेंडी प्रथम रहीं।

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