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September 30, 2022 2:36 AM

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अंतागढ़ क्षेत्र में नक्सलियों की आमद से लोगों में दहशत, बैनर पोस्टर लगाकर स्वतंत्रता दिवस का किया बहिष्कार

अंतागढ़/ट्रैक सीजी:

सुरक्षा बलों के आने के बाद अंतागढ़ क्षेत्र लगभग नक्सली एवं उनके द्वारा की जाने वाली घटनाओं को भूलने लगे थे, किंतु अपनी उपस्थिति का एहसास दिलाने नक्सलियों के संघम सदस्यों द्वारा खास मौकों में बैनर पोस्टर लगाना आम बात हो गई है।

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नक्सली ऐसे स्वतंत्रता दिवस का विरोध सालों से करते आए हैं, उनकी माने तो देश अभी भी सामंतवाद और उद्योगपतियों का गुलाम है, इसलिए नक्सली अक्सर आजादी के पर्व अर्थात 15 अगस्त में काला झंडा लगाकर स्वतंत्रता दिवस का विरोध करते आए हैं।

नक्सलियों ने ऐसा ही कारनामा इस बार किया है, सड़क पर पेड़ गिराकर किया यातायात बाधित कर बैनर-पोस्टर लगाकरआज़ादी का अमृत महोत्सव नहीं मनाने की लोगों से अपील की है।

सड़क पर पेड़ काटकर मार्ग किया अवरूद्ध, लगाया बैनर

अंतागढ़ के सिकसोड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत नक्सलियों ने स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार एवं अमृत महोत्सव को न मनाने की अपील करते हुए बैनर एवं पोस्टर लगाए हैं, और विरोध स्वरूप बड़ी संख्या में सड़क के किनारे लगे पेड़ों को काटकर मुख्य मार्ग को बाधित कर दिया गया है।

बता दें जिन स्थानों पर पेड़ों को काटकर पोस्टर लगाए गए हैं वहां से सुरक्षा बलों के कैंप की दूरी बहुत ज्यादा नहीं क्योंकि चारगांव में स्थित लौह अयस्क की खदान से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में रखें लोएस लेकर इसी मार्ग से गुजरती है बता दें 4 गांव माइंस के खुलने के कुछ दिनों बाद नक्सलियों ने माइंस के कार्य में लगी करीब 17 ट्रकों को आग के हवाले कर दिया था, जिसके चलते इस रास्ते के सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बलों के कैंपों में बढ़ोत्तरी की गई थी।

बावजूद इसके मेटाबुदेली चारगांव खदान की ओर जाने वाले मार्ग पर भैसासुर से सुरेवाही के बीच में बड़ी संख्या में पेड़ों को गिराकर स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करने बैनर-पोस्टर नक्सलियों द्वारा लगाया जाना सुरक्षा बलों के इंटेलिजेंस विभाग के लिए सोचनीय विषय है ।

काले पोस्टर में नक्सलियों ने आजादी के अमृत महोत्सव को शासक वर्गों का उत्सव बताया है, गरीब जनता के लिए इस अमृत महोत्सव का कोई मतलब नहीं है।

ग्रामीणों की सूचना पर बीएसएफ घटनास्थल की ओर रवाना हुई है, और मार्ग को बहाल करने के प्रयास जारी है. बड़ी संख्या में दोनों और वाहनों का को जाने से रोक दिया गया है।

यहां यह बताना भी जरूरी है की अंतागढ़ में कल से ही रेल का परिचालन शुरू हुआ है और रेलवे स्टेशन की इसी मार्ग में आता है ऐसी स्थिति में यदि नक्सलियों द्वारा कोई वारदात को अंजाम दिया जाता है तो अंतागढ़ क्षेत्र में 75 साल बाद चलने वाली यात्री ट्रेन के परिचालन पर ग्रहण भी लग सकता है जिस से इनकार नहीं किया जा सकता किंतु सुरक्षाबलो की तैनाती एवं उनकी लगातार पेट्रोलिंग नक्सलियों के इस नापाक मंसूबों को कामयाब होने नहीं देंगे ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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