RNI - NO : CHHHIN/2015/65786

October 7, 2022 12:45 AM

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अंतागढ़-चारगांव मार्ग पूर्णतः जर्जर, ग्रामीणो ने किया निक्को माइंस में लगे वाहनो की आवाजाही बंद

•ग्रामीणो ने लगाया आरोप: खनन प्रभावित क्षेत्रों को निक्को माइंस नहीं दे रही कोई भी सुविधा

अंतागढ़/ट्रैक सीजी:
चारगांव-मेटाबोदेली माइंस से निक्को कंपनी द्वारा लौह अयस्क परिवहन कर अरबों-खरबों रुपए कमाया जा चुका है, परंतु निक्को कंपनी द्वारा माइंस प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणो को अभी तक कोई सुविधा यहाँ तक कि मूलभूत सुविधाएँ भी मुहैय्या नही कराई गई है।

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वहीं सड़क की बात की जाए तो सड़क की स्थिति देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर इस सड़क पर चलने को मजबूर हैं।

ज्ञात हो कुछ समय पूर्व भी सड़क की जर्जर अवस्था को ले कर ग्रामीणों ने चक्काजाम किया था, जिसके पश्चात् कंपनी द्वारा आनन-फानन में गुणवत्ताहीन रॉ-मटेरियल डाल कर सड़क निर्माण के नाम पर केवल ख़ानापूर्ति कर दिया गया था, जो कि केवल छः महीने में ही पूरी तरह से जर्जर हो चुका है।

सड़क की जर्जर अवस्था को देखकर ग्रामीण काफी आक्रोशित है, क्योंकि सड़क की स्थिति ख़राब होने के बावजूद इन ग्रामीणो को इसी मार्ग से होकर आना जाना पड़ता है, जबकि उस जर्जर हो चुके मार्ग में आए दिन कोई ना कोई दुर्घटना घटित होती है, जिनमे कई गम्भीर रूप से घायल होते हैं जबकि कईयों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

बता दें इस मार्ग में कितने ही मासूमो ने अपनी जान गवाई है, जबकि कोई दिव्यांगों जैसा जीवन जीने को मजबूर है।जर्जर सड़क और उसी मार्ग पर माईंस से ट्रकों की आवाजाही ने कई घर बर्बाद किए हैं, जिसके चलते आज फिर ग्राम कोदागांव के ग्रामीणों ने निक्को माइंस में परिवहन कार्य पर लगे ट्रकों को रोक दिया।

वही इस विषय में ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सड़को की मरम्मत ठीक तरह से नही हो जाती तब तक इस मार्ग से निक्को माइंस के भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से बंद करा देंगे, क्योंकि इन्ही भारी वाहनों के चलते ही सड़क पूरी तरह से जर्जर तो हो ही चुकी है व इसकी वजह से आए दिन कोई ना कोई ग्रामीण इस जर्जर मार्ग पर दुर्घटना का शिकार हो ही जाता है। स्थानीय निवासी बीरसिंह जैन ने आगे बताया कि निक्को माइंस अब तक क्षेत्र से अरबों-खरबों रुपये का लौह अयस्क दोहन कर चुकी है, परंतु क्षेत्र के विकास हेतु ना ही कोई कार्य कर रही है और ना ही क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों को उनकी मूलभूत सुविधा मुहैया करा पाई है।

बता दें माइंस प्रबंधन द्वारा क्षेत्र में सुविधा देने का ढिंढोरा तो पीटा जाता है, परंतु ग्रामीणों को सुविधा के नाम पर सिर्फ धूल, मिट्टी और असुविधा ही अब तक मिल पाई है, सुविधा की अगर हम बात करें तो वह केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है।

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