RNI - NO : CHHHIN/2015/65786

September 27, 2022 12:15 AM

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मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ अंतागढ़ अनिश्चितक़ालीन हड़ताल पर

अंतागढ़/ट्रैक सीजी:

छत्तीसगढ़ में हड़तालों का दौर थमने का नाम नहीं ले रही है। छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के पश्चात् अब मध्यान्ह भोजन रसोईया संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं।

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प्रदेश में कर्मचारी अधिकारी दैनिक वेतन भोगी एवं अन्य विभाग के नुमाइंदों की हड़ताल लगातार जारी है, वजह है विधानसभा चुनाव का करीब आना, इस स्थिति में जितने भी शासकीय एवं अशासकीय कर्मचारी संघ है वह सरकार पर दबाव बनाने के लिए अक्सर हड़ताल का सहारा लेते हैं, कुछ दिनों पहले छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन संघ की हड़ताल खत्म हुई है और अब स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन मुहैया कराने वाले रसोईया संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल करना शुरू कर दिया है।

हड़ताल में बैठे रसोईया संघ के सदस्य

अंतागढ़ ब्लॉक मध्यान भोजन रसोईया संघ के तत्वाधान में आज से शुरू अनिश्चितकालीन हड़ताल अंतागढ़ नगर पंचायत के सामने प्रारंभ की गई, इन रसोईया कर्मचारी संघ का कहना है की महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को परेशानियों का सामना हो ही रहा है ऐसे में हम रसोईया कर्मी जिन्हें प्रतिदिन 50 रुपए की दर से वेतन दिया जाता है जिसमें 1 किलो टमाटर भी नहीं आता है और वह भी प्रतिमाह वेतन ना देकर दो चार महीनों का वेतन एक साथ दिया जाता है ऐसे में उन्हें अपने घर के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बता दें अंतागढ़ ब्लॉक की मध्यान भोजन रसोईया संघ के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है वही रसोईया संघ का आरोप है की कई बार हमने अपनी मांगों को लेकर जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारियों तक निवेदन किया किंतु हमारी मांगों को आज तक यह अनसुना करते आए हैं इसलिए आज परेशान होकर हमें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर आने को विवश होना पड़ा।

रसोईया संघ के ब्लाक अध्यक्ष ने कहा की इस महंगाई में जब टमाटर पचास रुपए किलो और डाल एक सौ से ऊपर है इस स्थिति में हमे पचास रुपए मात्र मेहनताना दिया जाता है जबकि हम सुबह 10बजे से शाम 3 बजे तक कार्य करते हैं।

संघ की उपाध्यक्ष बाजोती आचाला का कहना है की पचास रुपए प्रतिदिन के दर से हमे मेहनताना दिया जा रहा है जबकि हम पांच घंटे से छः घंटे लगातार काम करते हैं, और उसके बाद किसी और काम के लिए समय नहीं मिलता और कही दूसरी जगह रोजी में जा नही सकते, सरकार को इस महंगाई में हमारे और हमारे परिवार के गुजर बसर के विषय में सोचना चाहिए और कलेक्टर दर से हमे वेतन देना चाहिए।

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