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September 30, 2022 2:30 AM

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आज़ादी के पचहत्तर साल बाद भी नही बन सका पुल, जान जोखिम में डालकर शिक्षा लेने को मजबूर छात्र

अंतागढ़/ट्रैक सीजी:

एक और शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ शासन अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, स्वामी आत्मानंद उत्तकृष्ठ इंग्लिश मीडियम स्कूल के माध्यम से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के समतुल्य लाने की कोशिश की जा रही है वहीं अंतागढ़ ब्लाक के ग्राम कोलर के हाई स्कूल में पढ़ने वाले करीब चालीस से पैंतालीस प्रतिशत छात्र छात्राओं को जान जोखिम में डालकर शिक्षा लेना पड़ रहा है।

बता दें ग्राम कोलर के हाईस्कूल में पढ़ने वाले करीब पैंतालीस प्रतिशत बच्चे ग्राम पंचायत बैहासालेभाट एवं उसके आश्रित अन्य चार गांव से आते हैं, जिनके लिए बारिश के दिनों में कोलर और बैहासालेभाट के बीच पड़ने वाली मेंढकी नदी परेशानी का सबब बन जाती है।

नदी पार करते छात्र-छात्राएँ

देश की आज़ादी के 75 वें साल बाद भी इस नदी में आज तक पुल नहीं बनाया जा सका है, मजबूरी में हाई स्कूल के लिए इन गांवों के बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार कर शिक्षा लेने ग्राम कोलर आना पड़ता है।

बता दें ग्राम बैहासलेभाट रावघाट परियोजना के प्रभावित गांव में आता है, सालों से नक्सली गतिविधियों का हवाला देकर ग्राम बैहासलेभाट और कोलर को जोड़ने पुल का निर्माण नही कराया गया, किंतु रावघाट परियोजना लगभग शुरू भी हो चुकी है और रावघाट से लौह अयस्क का परिवहन भी किया जाने लगा है बावजूद इसके इन स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए पुल बनवाने की जहमत कोई नही उठा रहा है।

इस विषय में कोलर की जनपद सदस्या धन्तेश्वरी वट्टी का कहना है की इस पुल की मांग हम सालों से कर रहे हैं किंतु किसलिए यह पुल नहीं बनाया गया ये समझ से परे है, धन्तेश्वर का कहना है की जब बीएसपी द्वारा रावघाट से लौह अयस्क परिवहन किया जा रहा है और उसके प्रभावित गांव के बच्चे भरे बारिश में नदी पार करके स्कूल जाने को विवश है तो क्या बीएसपी प्रबंधन अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करके इस पुल को नही बनवा सकती।

जबकि इस विषय में बीएसपी के सीनियर माइनिंग इंजीनियर प्रमोद कुमार का कहना है की प्रबंधन सीएसआर व डीएमएफ मद राज्य शासन को जिला प्रशासन के माध्यम से दे देता है अब जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बन जाती है वो खनन प्रभावित गांवों में उनकी सुविधाओं के अनुरूप कार्य कराए।

बैहासालेभाट से कोलर हाई स्कूल नदी पार कर आने वाली छात्रा राजेश्वरी ने बताया की बारिश के दिनों में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, पानी ज्यादा होने की स्थिति में हफ्तों स्कूल नहीं जा सकते, कमर तक पानी में तो लगभग प्रतिदिन स्कूल जाते है पर कपड़े गीले हो जाने की वजह से काफी परेशानी होती है।

अन्य छात्रा रमशीला ने बताया की वो बैहासालेभाट ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम डांगरा से आती हैं अपने गांव से सायकल से नदी तक आती है और सायकल खड़ी कर वो नदी पार कर स्कूल जाती हैं, कपड़े भीगने की स्थिति में एक अतिरिक्त ड्रेस लेकर आती हैं किंतु नदी के पार कपड़ा बदलने में परेशानी तो होती ही है।

बता दें ग्राम कोलर में बालकों के लिए तो हॉस्टल है किंतु बालिकाओं के हॉस्टल नही होने की वजह से ज्यादा परेशानियों का सामना बालिकाओं को करना पड़ता है जिन्हे प्रतिदिन गीले कपड़ों में स्कूल तक आना होता है।

बारिश के दिनों में नदी में ज्यादा बाढ़ आने की स्थिति में ये बच्चे कई दिनों तक स्कूल नहीं जा सकते, कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है जब वो कोलर स्कूल आ तो जाते हैं किंतु ऐसे समय में नदी में आई अचानक बाढ़ की वजह से उन्हें वापस स्कूल से घर जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, ऐसी स्थिति में ट्रेक्टर की ट्रॉली में इन बच्चों को दूसरे रास्ते से जो करीब बीस किलोमीटर का है उस रास्ते से उन्हें उनके गांवों तक छोड़ा जाता है।

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