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September 30, 2022 2:32 AM

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शिकायत के एक माह बाद उच्च अधिकारियों के दबाव पर एफआईआर.. फिर भी कार्यवाही ढीली/ पुलिस प्रशासन अपने उच्च अधिकारियों की भी नही सुनता??

एफआईआर और खबर के बाद भी नही जागा पुलिस प्रशासन

शिकायत के एक माह बाद उच्च अधिकारियों के दबाव पर एफआईआर.. फिर भी कार्यवाही ढीली/ पुलिस प्रशासन अपने उच्च अधिकारियों की भी नही सुनता??

रियल इस्टेट कंपनी में नौकरी करने वाले कर्मचारी ने अनेक लोगों को लगाया चूना, लाखों रूपया लेकर हुआ फरार/जामुल थाने का मामला।

भिलाई (ट्रेक सीजी न्यूज) दुर्ग जिले के जामुल थाना प्रभारी को लेकर नित नई नई शिकायतें मिल रही है की ये फरियाद लेकर जाने वालों की सुनते नही ना ही एफआईआर की जाती है ना ही आवेदन लेकर जांच या कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है बल्कि उल्टे पीड़ित पक्षों को ही धमका चमका कर भगा देते है और उन्हे न्याय दिलाने में किसी तरह की कोई मदद नहीं करते है।थाना प्रभारी के इस रवईया का असर उनके अधीनस्थ अन्य पुलिस कर्मचारियों पर भी अच्छा खासा है कुल मिलाकर कहा जा सकता है की जामुल थाने से किसी को न्याय की उम्मीद बेमानी होगी। मामला यह है की थाना क्षेत्र अंतर्गत रियल इस्टेट में काम करने वाले एक कमीशन एजेंट ने अनेकों लोगों के साथ-साथ 2 कंपनियों को लाखों का चूना लगाया है।
मामला है गैलेक्सी रियल इस्टेट में काम करने वाले कृष्ण चंद्र नायक का जो रामाको डेवलपर्स में कमीशन एजेंट के तौर पर काम करता था ।उसने दोनों कंपनियों को लाखों का चूना लगा दिया है। घटना के विषय में बताया जाता है कि कृष्णचंद नायक जो गैलेक्सी रियल इस्टेट में नौकरी करता था वहां से कैश का ताला तोड़कर दो लाख पच्चीस हजार और रामको डेवलपर्स के एक क्लाइंट के द्वारा जमा किया हुआ एक लाख साठ हजार लेकर फरार हो गया है। घटना के बाबत जामुल थाना में अभियुक्त के विरुद्ध लिखित शिकायत लेकर पहुंचने पर थाना प्रभारी द्वारा एक माह तक लगभग घुमाया गया बाद में पुलिस प्रशासन के उच्च अधिकारियों के दबाव के बाद एफआईआर तो दर्ज कर लिया गया किंतु उसके बाद भी अब तक कार्यवाही शून्य है जो कहीं ना कहीं प्रभावितों के साथ अन्याय और दोषी को संरक्षण अथवा पुलिस प्रशासन की उनसे मिली भगत की ओर इशारा करता है। यह मामला सिर्फ पूर्व में बताए गए तीन लाख पच्च्याशी हजार का ही नही है बल्कि इसमें दोषी व्यक्ति द्वारा बहुतों को कई लाखों का चुना लगाया गया है।घटना प्रकाश में आने के बाद बहुत सारे लोग खड़े हो गए जिन लोगों को कृष्णचंद्र नायक ने थोड़ा थोड़ा मिलाकर कई लाख का चूना लगाया है। अगर सही तरीके से देखा जाए तो प्राप्त जानकारी के अनुसार कृष्ण चंद्र नायक ने जिन जिन लोगों को चूना लगाया है उनमें दीपेश को 1,20,000 का, रवि को 45,000 का ,योगेश कुमार जंघेल को 19,000 का ,राधे को 7,000 का, हिमाचल को 3,000 का ,सनोज चौधरी को 35,000 का, श्रीवास्तव को 16,000 का ,और होनू प्रसाद को 5,000 का चुना लगाया गया है ।इन सबों की राशि लेकर अभियुक्त अपने घर उड़ीसा फरार हो गया है। रामको डेवलपर्स के मालिक हशमत आलम द्वारा जामुल थाने में कमीशन एजेंट के विरुद्ध जो लिखित शिक़ायत दी गई है उसमें अभियुक्त के घर का पूरा पता बताया गया है,जिस पर जामुल थाना प्रभारी ने एफ आई आर दर्ज करने का आश्वासन किंतु एफआईआर नही की गई बाद में उच्च अधिकारियों को शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई। जानकारी के अनुसार अभियुक्त उपर्युक्त समस्त लोगों का पैसा लेकर अपने गांव बुंदिया कॉलोनी,गांव गितारी, पोस्ट बोरीबोली,थाना पारगंज, ज़िला ढेंनकनाल फरार हो गया है। हशमत आलम के द्वारा लिखित शिकायत करने के बाद और भी विभिन्न लोगों द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस को शिकायत मिलने के बाद जामुल थाना के प्रभारी याकूब मेनन ने और दुर्ग जिले के एसपी ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा है कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। तमाम पीड़ितों को आश्वस्त किया है कि वह इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अभियुक्त को धर पकड़ करने का काम शुरू करेंगे। किंतु अब तक कार्यवाही शून्य है जो पुलिस विभाग की मिलीभगत की ओर इशारा करता है जो पीड़ितों को न्याय दिलाने की बजाय कार्यवाही ना कर दोषियों को संरक्षण दे रही है ।पुलिस की मानें तो अभियुक्त अतिशीघ्र पुलिस की गिरफ्त में होगा। क्या अभियुक्त द्वारा अपने मालिकों का तोड़ा भरोसा और बहुत सारे लोगों के साथ विश्वासघात कर लाखों की की गई लूट पर पुलिस विभाग द्वारा त्वरित कार्यवाही करते उसकी गिरफ्तारी कर पीड़ितों को न्याय दिलाने में तथा दोषी को सजा दिलाने में पुलिस अपनी ईमानदार भूमिका निभाने में सहयोग करेगी यह तो आने वाला वक्त बताएगा।
समाचार प्रकाशन के बाद भी अब तक पोलिस प्रशासन है की कुंभकर्णी नींद से जागा नही है इससे स्पष्ट होता है की आम जनता के हितों और सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन कितना मुस्तैद है। जो उच्च अधिकारियों को जानकारी के बाद भी कार्यवाही अब तक तय नहीं हुई और ना ही दोषी की गिरफ़्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के मामले में पुलिस प्रशासन संजीदा है। अब तो लगता है की पीड़ितों को सीधे न्यायालय से ही न्याय की उम्मीद है।

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