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September 30, 2022 3:28 AM

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स्नेक बाइट के प्रति लोगों मे अब बढ़ने लगी जागरूकता : डॉ. भेषज रामटेके, बीएमओ

•झाड़ फूंक के जाल में ना फ़ंसकर ग्रामीण अब सीधे करने लगे अस्पतालों का रूख

अंतागढ़/ट्रैक सीजी/अलका गर्ग:
अंचल के सबसे बड़े अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में प्रत्येक वर्ष के मुक़ाबले बरसात के इस मौसम में स्नेक बाइट के मरीज़ अधिक आ रहे हैं, परंतु राहत की बात यह रही कि इस सीजन में अब तक सर्पदंश से होने वाली मौतों में काफ़ी गिरावट आयी है, उसका कारण समय पर अस्पताल तक नहीं पहुँच पाना व जिससे ज़हर कि मात्रा रक्त में पूर्णरूप से प्रवाहित हो जाना है।

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इस सम्बंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ के ब्लॉक मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. भेषज रामटेके से बात की गयी तो उन्होंने बताया की स्नेक बाइट के मरीज को अगर दर्द हो रहा हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के उसे दर्द के लिए एस्पीरिन न दें, इससे ब्लीडिंग बढ़ सकती है। डॉ. रामटेके ने आगे बताया कि सांप के काटने की पहचान करने के लिए यह देखें कि शरीर में लगा घाव कैसा है, अगर घाव के आसपास सूजन और लाली है, काटने की जगह पर दर्द हो रहा है, सांस लेने मे तकलीफ है, उल्टी और मतली आ रही है, आंखों से साफ नहीं दिख रहा है तो समझ लीजिए कि यह सारे लक्षण सांप काटने के हैं। इसमें मुख्यतः तीन प्रकार से सर्पों व उनके होने वाले दुष्प्रभावों का व उनकी पहचान के विषय में अधिक जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यतः तीन प्रकार से ये शारीरिक सह मानसिक क्रियाओं को बाधा पहुँचाते जिनमे सर्वप्रथम आते हैं वह जो मांसपेशियों को गला देते हैं, दूसरे स्थान पर वे सर्प आते हैं जो रक्त शरीर में रक्त प्रवाह को पूर्णतः बाधित करते हैं, तीसरा जो कि करैत व सबसे ख़तरनाक श्रेणी में आने वाला साँप है जो की सीधे मस्तिष्क की क्रियाओं को पूर्णतः बाधित करता है व जिसके दंश से बचने की सम्भावना अत्यधिक कम होती है इसका सर्वप्रथम लक्षण है आँखों की पलकों का ना खुलना व गले में तेज दर्द का होना।

डॉ. भेषज रामटेके, ब्लॉक मेडिकल आफ़िसर अंतागढ़

बतौर सावधानी डॉ. रामटेके ने बताया कि सांप ने जिस भी अंग पर काटा उसे हिलाएं नहीं, बल्कि उस स्थान के थोड़ा ऊपर हल्का दवाब बनाते हुए कपड़े से बांध दें और बिना देर किए शीघ्र ही अस्पताल पहुंचे व डॉक्टर को दिखाएं।

बता दें, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में इस वर्ष करैत जैसे सर्पों के दंश से प्रभावित ग्रामीण को भी समय से अस्पताल लाने पर त्वरित उपचार करके बचाया जा सका है जो अन्य वर्षों की तुलना में काफ़ी अच्छा औसत रहा है।

डॉ. रामटेके से संवाददाता ने जब पूछा कि क्या सर्पदंश से उपचार हेतु एंटिवेनम सह अन्य ज़रूरी दवाइयाँ जो मरीज़ों को दी जानी चाहिए वह पर्याप्त मात्रा में अस्पताल में उपलब्ध है, इस पर डॉ. भेषज रामटेके ने कहा कि बिल्कुल उपलब्ध है, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ के साथ ही समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी इसके उपचार हेतु सम्पूर्ण व्यवस्था है। सर्पदंश से जो भी मरीज़ यहाँ आते हैं, उनमे निन्याबे फ़ीसद को बचाया जा चुका है।

डॉ. भेषज रामटेके ने आगे बताया कि इस वर्ष अठारह वर्ष से लेकर लगभग पचास वर्ष की आयु वर्ग के ग्रामीणो जिनमे बालिका, माताएँ, युवक, युवतियों सह सिकसोड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र से आए जवान जिन्हें करैत ने काटा था, वह भी पूर्णतः स्वस्थ होकर वापस अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं।

इस वर्ष सर्पदंश के जितने भी मामले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतागढ़ में आए व चिकित्सकों की लगन से जो सकुशल अपने घर, कार्यक्षेत्र पर शीघ्र ही लौट गए उनके नाम कुछ इस प्रकार हैं:-
रवीना (18) अंतागढ़, सुखियाबाई (45) कामता, सवलुराम (45) सिकसोड़ थाना, प्रीति निषाद (25) अंतागढ़, जयलाल (35) कोदागाँव, अनिल कुमार (32) पोड़गांव, डोमेंद्र (21) कौडोखसगाँव व बालकिशन (42) अंतागढ़ आदि शामिल हैं।

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