RNI - NO : CHHHIN/2015/65786

December 8, 2022 4:00 AM

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अबूझमाड़ के गांवो में कैम्प लगाकर मेडिकल टीमें कर रही ईलाज। नारायणपुर जिले के मरीजों को भी मिल रहा ईलाज का लाभ।

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बीजापुर- 39 आदिवासियों की मौत की खबरों से फैली सनसनी के बाद अबूझमाड़ क्षेत्र में प्रशासन ने मुस्तैदी बढ़ा दी है। बीजापुर से मेडिकल टीमें अब अंदरूनी गांवो में पहुंचकर कैम्प लगा रही हैं। कैम्प में बीजापुर सहित नारायणपुर जिले के पीडियाकोड़ डोगा से भी मरीज ईलाज करवाने आ रहे हैं।

जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत ईतामपार में 5 आश्रित ग्राम दारमेड़, बोडगा, बडे़पल्ली, छोटेपल्ली और झिल्ली आते हैं। इन्द्रावती नदी उस पार इन संवेदनशील गांवों में स्वास्थ्य सुविधा के अलावा शासकीय योजनाओं का संचालन प्रशासन के लिए शुरू से ही बड़ी चुनौती रही है। बरसाती मौसम के 4 माह यह गांव पूरी तरह विकासखंड मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है। जिसके कारण यहां के ग्रामीणों अपनी आजीविका के लिए बरसात के पूर्व ही दैनिक उपयोगी सामग्री का संग्रहण करना पड़ता है। ऐसे कई कठिनाईयों और चुनौतियों के बावजूद प्रशासन ग्रामीणों के मूलभूत आवश्कताओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका मूलक गतिविधियों से इनको लाभन्वित करने लगातार प्रयास कर रही है।

ग्राम पंचायत ईतामपार के सचिव कोमल निषाद ने बताया कि ग्राम झिल्ली में 10 नवंबर से 3 दिवसीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया है। शिविर को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है आश्रित ग्रामों के अलावा बैल, ताकिलोड़, मर्रामेटा रेकावाया और तो और ओरछा विकासखंड के पीड़ियाकोड और डोगा से ग्रामीण आ रहे है।

इस शिविर में 10 नवंबर को जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी मनीष सोनवानी प्रचार-प्रसार अधिकारी प्रशांत यादव ने पहुंचकर ग्रामीणों को महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत लिए जाने वाले कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। मनीष सोनवानी ने ग्रामीणों को बताया कि महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत जाबकार्ड बनवाकर गांव में ही 100 दिवस का रोजगार मिल सकता है, जिसमें प्रत्येक दिवस 204 रू मजदूरी प्रदान की जाती है। अंदरूनी क्षेत्र में तालाब, डबरी और कुआं निमाण कराकर ग्रामीणों को आजीविका संवर्धन हेतु प्रेरित किया गया।

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