तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां एक ओर गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें बेघर कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर पैसे वाले और रसूखदार लोगों के नाले पर बने अवैध दुकानों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में नगर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर कई गरीब परिवारों के घरों को तोड़ा गया। इन परिवारों का कहना है कि बिना पर्याप्त नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के उनके आशियाने उजाड़ दिए गए, जिससे वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
वहीं, दूसरी तरफ नाले के ऊपर और किनारे बने कई पक्के दुकान आज भी जस के तस खड़े हैं। खास तौर पर दीनदयाल चौक पर नाले के ऊपर बनी एक कपड़े की दुकान और भैरवगढ़ धाम के आगे स्थित एक ट्रेडर्स की दुकान को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो अब तक नहीं हटाई गई हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन दुकानों के मालिक प्रभावशाली और पैसे वाले लोग हैं, जिन पर प्रशासन हाथ डालने से बच रहा है। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर पक्षपात और भेदभाव के आरोप लग रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अगर अतिक्रमण हटाना ही उद्देश्य है, तो कार्रवाई सभी पर समान रूप से होनी चाहिए। केवल गरीबों को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं है।
इस पूरे मामले में नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या कदम उठाता है और क्या सभी अवैध निर्माणों पर समान रूप से कार्रवाई होती है या नहीं।