तिल्दा-नेवरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत देवरी एवं घुलघुल में अग्रसेन स्टील एवं पावर लिमिटेड की प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे इस परियोजना के खिलाफ खुलकर विरोध जता रहे हैं।
*पहले भी विरोध के चलते निरस्त हो चुकी है जनसुनवाई*
ग्रामीणों के अनुसार, भारी विरोध के कारण पहले भी इस जनसुनवाई को निरस्त करना पड़ा था। उस दौरान ग्रामीणों ने अनुभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय और तहसील कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन को पीछे हटना पड़ा था।
*सरपंच पर फर्जी एनओसी देने का आरोप*
मामले में ग्रामीणों ने पंचायत स्तर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरपंच द्वारा फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी किया गया, जिसके आधार पर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में शिकायत दर्ज कर जांच की मांग भी की गई है।
*स्थानीय नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल*
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि तिल्दा-नेवरा के कुछ नेतागण जनसुनवाई को सफल बनाने के लिए कंपनी प्रबंधन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, ये नेतागण लोगों को बरगलाने और दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि किसी तरह जनसुनवाई संपन्न कराई जा सके।
*पर्यावरण और आजीविका को लेकर चिंता*
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे खेती, जलस्रोत और आम जनजीवन प्रभावित होगा। उनका कहना है कि बिना ग्रामसभा की सहमति के किसी भी परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
*पंचायत और प्रशासन पर सवाल*
ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि:
*ग्रामसभा की अनुमति के बिना निर्णय लिए जा रहे हैं*
पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है
जनभावनाओं की अनदेखी किया गया है
*ग्रामीणों की चेतावनी*
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपनी जमीन, जल और पर्यावरण की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
देवरी की यह जनसुनवाई अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है, जहां ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया।