बैतूल। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में लंबे समय से चल रहे कथित भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण कार्यों की आखिरकार खुलकर पोल सामने आ गई है। बैतूल जिले में खराब गुणवत्ता के सड़क निर्माण कार्य को लेकर एक ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विभाग के कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित रिश्वतखोरी एवं कमीशनखोरी से जुड़े ऑडियो भी वायरल हो चुके हैं।
कार्यालय मुख्य अभियंता (भोपाल परिक्षेत्र), लोक निर्माण विभाग, भोपाल द्वारा जारी आदेश क्रमांक 3888/पंजीयन/बैतूल/भो.प./2025 दिनांक 7 मई 2026 के अनुसार मेसर्स श्रीराम कृष्णा कंस्ट्रक्शन, प्रो. संदीप कुमार उमरे, जिला सीहोर को ब्लैकलिस्ट किया गया है।
जानकारी के अनुसार उक्त ठेकेदार द्वारा ग्राम लीलाझर से हिरावाड़ी मार्ग निर्माण कार्य (लंबाई 3.32 किमी) किया जा रहा था। दिनांक 5 मई 2026 को गठित जांच दल—मुख्य अभियंता भवन रीवा श्री एस.सी. वर्मा एवं जीएम टेक्निकल श्री आर.बी. तिवारी—द्वारा निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में सामने आया कि सड़क के कई हिस्सों में सीसी कार्य क्षतिग्रस्त हो रहा है तथा निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार नहीं किया गया। इसके अलावा सीआरएम और डब्ल्यूएमएम सामग्री की ग्रेडिंग भी प्रथम दृष्टया मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। निरीक्षण दल ने यह भी पाया कि मार्ग पर डामरीकरण की तैयारी तक नहीं की गई थी, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि कार्य की गुणवत्ता प्रथम दृष्टया ही अत्यंत खराब पाई गई, इसलिए कारण बताओ नोटिस जारी करने का भी औचित्य नहीं बचा। इसके बाद मध्यप्रदेश शासन के प्रावधानों के तहत ठेकेदार का पंजीयन काली सूची में दर्ज कर दिया गया।
गौरतलब है कि बैतूल पीडब्ल्यूडी में पहले भी अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कथित लेनदेन एवं कमीशनखोरी से जुड़े ऑडियो वायरल हो चुके हैं। आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अधिकारियों के संरक्षण में घटिया निर्माण करने वाले ठेकेदारों को लगातार काम दिए जा रहे थे। अब ठेकेदार पर हुई ब्लैकलिस्ट कार्रवाई ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल ठेकेदार पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त न किया जाए, बल्कि उन अधिकारियों की भी जांच हो जो ऐसे निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए जिम्मेदार थे।
